Pages
- Home
- CAREER AND GUIDANCE
- ALAP 2025-26
- PISA CONTENTS
- KVS NEW SPLIT UP SYLLABUS
- OER { OPEN EDUCATIONAL RESOURCES }
- E- Newspaper and Periodicals/ Magazines
- CBSE QUESTION PAPER / SAMPLE PAPERS
- CBSE
- NCERT
- SPORTS CORNER
- Maps/ Atlas Links/ PPT
- GANDHIANA (GANDHI COLLECTION)
- CYBER SECURITY AWERNESS
- BOOK REVIEW
- Reuse of Books
- NEW EDUCATION POLICY
- NIPUN BHARAT
Monday, 31 July 2017
31 जुलाई 2017 को विद्यालय में मुंशी प्रेमचंद जयंती मनाई गई | इस उपलक्ष में कक्षा सात की तान्शी ने मुंशी प्रेमचंद जी पर अपने विचार व्यक्त किये |
प्रेमचंद (३१ जुलाई १८८० – ८ अक्टूबर १९३६) हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं।मूल नाम धनपत राय वाले प्रेमचंद को नवाब रायऔर मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है।उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी (विद्वान) संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं।
Subscribe to:
Comments (Atom)




